Saturday, February 27, 2010

...बुरा न मानो होली है

आमिर खान-
एक काबिल ईडियट मैं,
कामयाबी बोलती है
पैंट के अंदर की चड्ढी,
राज दिल का खोलती है
रुल करो एक भूल करो
फिर तोहफा मेरा कुबूल करो!

राज ठाकरे-
विकट मराठी का सेवक हूं
तन स,े धन से, गन से।
यूपी और पटना वालों को
पीटूं पूरे मन से!
अमर सिंह-
लोहियाजी का पीकर प्याला,
घूमे अमर सिंह मतवाला
आ.जम आये मुलायम भैया
पीटो गाल, बजाओ ताली
लेकिन हो जायेगी प्यारे...
सपा से फिल्म इंडस्ट्री खाली लेकिन
गुर्दे का टेंशन झेलूं
जयाप्रदा संग होलो खेलूं!
शरद पवार-
'महंगाई का ढोता भार,
इकलौता मैं शरद पवार
आलू,दाल, प्याज का ठीकरा
मेरे सिर पर फूटा
कुछ दिन और बचे हैं जी लो,
भंग में नमक मिला कर पी लो!
ललित मोदी-
एक एक रन के बदले
लख लख रुपया पाओ
टेस्ट क्रिकेट से झाड़ के पल्ला
आईपीएल में आओ
बिको तुम जैसे बिकता है रंग,
काट दो होली में हुड़दंग!

गुर्दे वाले नेता जी का साक्षात्कार

होली है.............होली है..........होली है..........................................................................................................
हाल ही में इन नेता जी को कभी अपनी उनकी रही पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। फिलहाल काई ठौर ठिकाना नहीं मिला। अब वे जल्द ही अपनी एक नई पार्टी बनाने की सोंच रहे हैं। होली के मौके पर उनसे एक पत्रकार महोदय ने उनकी पर्सनल लाईफ और उनके इंटरेस्ट पर बातचीत की। बुरा न मानो होली है....
स्त्री और इस्त्री में क्या फर्क है ?
एक को छूने से करंट लगता है और दूसरी को देखने से ही।
शादी लड्डू ही क्यों है , पेड़ा क्यों नहीं है ?
अरे मैडम , दोनों के साइज पर भी ध्यान दीजिए। पेड़ा चपटा होता है , जबकि लड्डू गोल। शादी के बाद आदमी को गोल गोल ही तो घूमना पड़ता है।
राम सीता है , तो राम कौन है ?
मैडम , आप ये भी नहीं जानतीं कि राम टेलर होगा।
पत्नी और वैम्पायर में क्या अंतर है ?
चुडै़ल एक ही बार में खून चूस लेती है , लेकिन पत्नी धीरे धीरे।
अगर किसी सुपर स्टार हीरो से मिलने का मौका मिले , तो ...
सारी , लड़कों में मेरा कोई इंटरेस्ट नहीं है।
अगर कालू जादव प्रधानमंत्री बन जाएं , तो क्या होगा ?
हर फाइव स्टार होटल में सत्तू और दही चूड़ा मिलेगा। वह भी स्पेशल डिस्काउंट के साथ।
लव और अरेंज्ड मैरिज में क्या अंतर है ?
कोई नहीं। दोनों ही बाद में डी अरेंज्ड हो जाती हैं।
बस में आपके साथ लड़कियां ही हों , तो आप क्या करेंगे ?
मैं अकेला क्या कर पाऊंगा। लड़कियां जो चाहे , कर लें। मैं तो ड्राइवर को पैसे देकर गाड़ी आगे बढ़वाता रहूंगा।
कोई हाट हीरोइन आपके पड़ोस में रहने आ जाए तो ...
सबसे पहले , अपनी बीवी को मायके भेज दूंगा।
शादी के पहले और शादी के बाद में अंतर क्या है ?
शादी से पहले जानेमन और बाद में जान मत खाओ।

...तुम याद आईं !

होली के दिन नेताजी अकेले बैठे होली के सीन टीवी पर देख रहे थे। साथ ही यह गाना भी गुनगुना रहा थे, तुमसे मिलने का जब न कोई बहाना मिले तो होली के बहाने आ गए। तभी मोबाइल घनघना उठा। महाराष्ट्र से पार्टी के नए नवेले अध्यक्ष जी की काल थी। उन्होंने पुराने अध्यक्ष जी को अपने घर पर याद किया था। मूड तो नहीं था पर होली पर दुश्मनी करने का भी इरादा नहीं था। सो चले गये उनके घर। वहां पहले से ही श्रीवास्तव जी मौजूद थे। आते ही शुरू हो गए। देखा न, हम कह रहे थे कि हुईन रुक जाओ नहीं तो कोऊ न पूछेगा। अब हमरी बात नहीं मानी न लेव भोगो। अब खिंचाई तो खिंचाई, जैसे ही अध्यक्ष जी के घर में कदम रखा, चेहरे पर अबीर गुलाल पोतकर एक गुझिया भी मुंह में ठूंस दी। इसके बाद बोले आज राजनीतिक चर्चा कत्तई नहीं। आज बस बालीवुड पर ही ...! छूटते ही बोले, यार, क्या होली में हीरो हिरोइन भी हाथों में रंग गुलाल लेकर कूदते फिरते हैं। तपाक से जवाब मिला, तुम भी अजीब अहमक हो यार, क्या हीरो हिरोइन इंसान नहीं हैं फिर रोमांस के सीन देते-देते उनमें प्यार के बीज भी पनपने लगते हैं। अध्यक्ष जी की सुई अमिताभ-रेखा , सलमान ऐश्वर्या और कैट की ओर घूम चुकी थी। वे कहने लगे, क्या इस रंग भरे मौसम में बिग बी को रंग बरसे याद नहीं आता होगा। वे बोले, क्यों नहीं याद आएगा, क्या तुम्हें कालेज वाली करीना अरे सब्बो की याद नहीं आती। वे थोड़ा घबराए। फिर सकुचाते हुए बोले, धीरे बोलो। श्रीमतीजी ने सुन लिया तो मेरी शामत आ जाएगी। मैंने अगला तीर छोड़ा उस समय तो तुम सब्बो को रंग लगाने उसके घर तक पहुंच गए थे। आगे बोले, खैर छोड़ो। यह बताओ कि क्या अपने छोटे नवाब करीना के संग ही होली मनाएंगे या फिर पुरानी ड्योड़ी में भी हाथ आजमाएंगे। उन्होंने उनकी समझ को धता बताते हुए कहा, छोटे नवाब को क्या पड़ी है, जो करीना जैसी जीरो फिगर को छोड़कर कहीं और जाए। हां, मिस्टर खिलाड़ी जरूर होली खेलने के लिए यूपी बिहार लूटने वाली के पास जा सकते हैं। सिंह साहब बोले, रणबीर और दीपिका भी होली खेलेंगे। इस पर वे बोले कहा, दीपिका रणबीर के साथ जब चाहे तब होली खेल सकती है। हो सकता है कि रणबीर सोनम कपूर से होली खेलने पहुंच जाएं। अध्यक्ष जी सुरूर में थे पर उन्हें डर भी था कि पार्टी और मीडिया वाले कहीं का नहीं छोडेंग़े। ऊपर से दिल्ली की तिकड़ी हर समय गिद्ध जैसी नजर गड़ाए बैठी रहती है। इस पर सिंह साहब ने पान का बीड़ा मुंह में डालते हुए कहा, यार, सुष्मिता की तो अभी उसके कई प्रेमियों के साथ मामला टूट चुका है। अब वे होली किसके साथ मनाएंगी। इस पर नए अध्यक्ष जी का जवाब था, यार, झांसी की रानी तो कुछ भी कर सकती है।

Thursday, February 25, 2010

महान हैं सचिन

२४ फरवरी को सचिन तेंदुलकर ने ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में इतिहास रच दिया। उन्होंने अपने करियर की वह सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की जिसको पाने को दुनिया के कुछ महान खिलाड़ी ही सोंच सकते हैं, पर हमारे सचिन तो वाकई महान हैं। शायद तभी उन्हें हमारे देश के लोग क्रिकेट का भगवान कहते हैं। कल जब सचिन ने मैच के बाद टीवी पर कहा, मैं यह सेंचुरी भारत के लोगों को समर्पित करता हूं तो अपने आप ही आंखें भींग गईं। वजह यह रही कि वे दिन याद आ गए जब वह लगातार असफल हो रहे थे और मीडिया व जनता का एक वर्ग उन्हें रिटायर होने की सलाह दे रहा था। सचिन के स्टेटमेंट पर ध्यान दें ...हर उतार चढ़ाव में मेरे साथ रहे प्रशंसक, जाहिर है कि गर्दिश के वे दिन उन्हें भी याद आते होंगे और उन दिनों वह बहुत उदास भी रहे होंगे। लेकिन कमाल की बात यह है कि उन्होंने कभी भी अपने आलोचकों को पलट कर जवाब नहीं दिया। उनसे बहस नहीं की। बस यही कहते रहे कि उनकी बातों का जवाब मेरा बैट देगा और उन्होंने उसका जवाब हमेशा से ही अपने बैट से दिया। उनके विपरीत हमारे राजनीतिज्ञों को देखिए। हर समय बस आरोप प्रत्यारोप में लगे रहते हैं। एक बाल ठाकरे हैं जिन्होंने सचिन जैसे महान खिलाड़ी को भी नहीं बख्शा था। ये लोग सचिन से सबक ले सकते हैं।अगर सबक लेना हो तो सचिन से हम कुछ सबक तो ले ही सकते हैं, खास कर ऐसे लोग जो क्रिकेट खेलना नहीं जानते, सिर्फ देखना जानते हैं। पर कुछ भी बोलने से न सोचते हैं और न कभी भी नहीं चूकते। ऐसे लोगों को कुछ भी बोलने से पहले अपन आप को और अपनी हकीकत देख लेनी चाहिए। सचिन के इस शतक के बाद पूर्व संपादक प्रभाष जोशी की याद भी आई। आज से साढ़े तीन महीने पहले की बात है। ऐसा ही एक मैच था जिसमें सचिन ने बहुत ही बढ़िया पारी खेली थी लेकिन टीम को जीत दिलाने से पहले ही आउट हो गए थे। जोशी जी उस दिन इतने दुखी हुए कि उसी रात उनका हार्ट अटैक हो गया। कल अगर जोशी जी यह मैच देख रहे होते तो कितना खुश होते। सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा शतक, सबसे ज्यादा अर्ध शतक। इंटरनैशनल क्रिकेट के जिन दो रूपों में सचिन हिस्सा लेते हैं, उन दोनों में ही वह न सिर्फ शीर्ष पर हैं, बल्कि काफी दूर तक उनके पीछे कोई नहीं है। दुनिया में पहला वनडे इंटरनैशनल मैच ५ जनवरी १९७१ को आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेला गया था। तब से अब तक गुजरे चालीस सालों में आठ गेंदों के चालीस चालीस ओवरों से लेकर छह गेंदों के साठ-साठ ओवरों तक और अंत में मौजूदा फार्मेट तक लगभग दो हजार वनडे इंटरनैशनल खेले जा चुके हैं, लेकिन दोहरा शतक इनमें आज तक एक भी नहीं बन पाया है। ठीक बराबर १९४ रनों के साथ इसके सबसे ज्यादा करीब दो खिलाड़ी पाकिस्तान के सईद अनवर (भारत के खिलाफ) और जिंबाब्वे के चार्ल्स कोवेंट्री (केन्या के खिलाफ) ही पहुंच पाए हैं। कितना अजीब है कि अभी तक यह करिश्मा अपने जीवन के छत्तीस बसंत देख चुके सचिन तेंडुलकर के ही लिए छूटा हुआ था। सचिन ने वनडे इंटरनैशनल का एकमात्र डबल सेंचुरी सचिन ने केन्या, बांग्लादेश, जिंबाब्वे या बरमूडा के खिलाफ नहीं, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाई है, जिसकी गेंदबाजी इस समय दुनिया में सबसे अच्छी मानी जा रही है। २५ चौकों और तीन छक्कों से बड़ी बात तो इस उम्र में हिरन की चपलता के साथ बटोरे गए उनके सिंगल्स हैं, जिनके बगैर इस एकदिवसीय क्रिकेट में इतनी बड़ी पारी खेलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जो लोग ऐसा मानते रहे हैं कि सचिन में ज्यादा बड़ी पारियां खेलने का माद्दा नहीं है, या यह कि उन्हें अब अपनी उम्र के हिसाब से ही खेलना चाहिए, उन्हें अब शायद अपनी समझ पर पुनर्विचार करना पड़े।

Sunday, February 21, 2010

अब आईपीएल ३

इस खेल में कारोबार है, पैसा है, मनोरंजन है। चियरलीडर्स के ठुमके हैं। विवाद है और प्रसिद्धि पाने के सारे मसाले एक साथ मौजूद हैं। जब इस खेल के सत्र की शुरुआत होने की घोषणा होती है तो भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों की निगाहें इस पर होती है। दुनिया के जो खिलाड़ी खेल नहीं पाते वे अपनी किस्मत को कोसते हैं और जो खेलते हैं वे रातों रात स्टार तो बनते ही हैं साथ ही करोड़ो के मालिक भी बन जाते हैं। इसमें पैसों की इतनी बरसात होती है कि खिलाड़ी खेल प्रेम के लिए कम बल्कि पैसे के लिए ज्यादा खेलते हैं। इसने क्रिकेट का रूप तो बदला ही है, साथ ही जब यह शुरू होता है तो और कुछ हो न हो पर भारत में राजनीतिक दृष्टि से महाभारत जरूर शुरू करा देता है। इससे राज्य सरकारें तो प्रभावित होती ही हैं केंद्र सरकार भी हिल जाती है। मीडिया को महीनो तक का सुर्खियां भी मिल जाती है। हम बात कर रहे हैं आईपीएल की। यानि भद्रजनों के खेल के तीसरे संस्करण की। दो टूर्नामेंट होने के बाद अब आईपीएल थ्री की शुरूआत १२ मार्च से होने जा रही है। क्रिकेट लीग को नेस्तानाबूत करने के लिए बीसीसीआई ने भारतीय बाजार में यह मिसाइल दागी थी। इसका निशाना भी अचूक रहा। आईपीएल का रंग ऐसा चढ़ा कि लोग सब कुछ भुला बैठे। पैसे, ग्लैमर और चौके-छक्कों की बरसात वाला यह टूर्नामेंट अचानक लोगों के सिर चढ़ कर बोलने लगा। ऐसा होना लाजिमी भी था क्योंकि दर्शकों के लिए क्रिकेट मनोरंजन का साधन है और आईपीएल से बढ़िया तमाशा भला और कहां देखने को मिलता। पहले आईपीएल में जहां इसने शुरुआती सफलता के झंडे गाड़े, वहीं दूसरा आईपीएल दक्षिण अफ्रीका में आयोजित कराना राष्ट्रीय अस्मिता का प्रश्न बन गया। अब तीसरे सीजन में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की नीलामी और उनको शामिल न करने के मामले ने पूरे देश में महाभारत की स्थिति पैदा कर दी। इतना बवाल हुआ कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। इस विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि दोनो देशों के अंदर जमकर बयानबाजी हुई। पहले जहां टीम के मालिकों की निगाहें प्रतिभा तलाशती नजर आती थी वहीं वे अब चीयरलीडर्स के ठुमकों के बीच अपनी टीमों के लिए खिलाड़ी चुनते हैं। अब देखना है कि आईपीएल थ्री में चियर लीडर्स के ठुमकों के बीच बादशाह कौन सी टीम बनती है।

युवा क्रांति का दौर

यह युवा क्रांति का दौर है और हर क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ती जा रही है। राजनीति का क्षेत्र हो, उद्योग व्यवसाय का, कला साहित्य एवं संस्कृति का क्षेत्र हो या फिर सेवा का हर तरफ युवा नेतृत्व परवान चढ़ रहा है। राजनैतिक पार्टियों ने पुरानी पीढ़ी के संरक्षण में भावी रणनीति के तहत युवाओं के महत्व को समझा और अपने-अपने दलों के युवाओं को आगे लाकर अपनी विचारधारा को पुष्ट करने का अभियान चलाया। देश भर के युवाओं में समाज, राष्ट्र और स्वयं के हित में कुछ कर गुजरने का हौसला बुलंद हो, इस उद्देश्य से युवा नेता राहुल गांधी पूरे देश में यात्रा करके युवाओं को अपने साथ जोड़ रहे हैं। अपनी विचारधारा से युवाओं को जोड़ने और उन्हें सही दिशा में कदम बढ़ाने के लिए वे आगे-आगे चल रहे हैं। उनके विचारों से प्रभावित होकर उनके पीछे-पीछे कदम ताल करते हुए अधिकांश युवा इस मुहिम में शामिल होते जा रहे हैं। युवाओं को देश के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए उनमें निष्ठा, साहस और उत्साह की भावना जगाने के उद्देश्य से राहुल गांधी का अभियान जारी है। केवल यह मान कर इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि वे किसी पार्टी विशेष के पदाधिकारी हैं। बल्कि इसकी मूल भावना को महत्व दिया जाना चाहिए। जगह-जगह अपनी यात्राओं में राहुल गांधी राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे मुद्दे पर जोर दे रहे हैं। युवाओं में जोश पैदा करके उन्हें अपने अस्तित्व की पहचान करा रहे हैं। विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के लोग राहुल गांधी के तेवरों का भले ही विरोध कर रहे हों और उनके प्रभाव को नकारने का प्रयास कर रहे हों किंतु उनकी आंधी से वे भीतर ही भीतर विचलित होते भी दिखाई दे रहे हैं। राहुल द्वारा युवाओं को दिये जा रहे संदेश का असर तो दिखने लगा है किंतु उनके विरोधी आशातीत इस प्रभाव को राजनैतिक हथकंडा करार रहे हैं। यह सही है कि देश में युवा भागीदारी में वृद्धि हुई है। स्वाभाविक है कि इन बढ़ते आंकड़ों का राजनैतिक लाभ उस पार्टी के खाते में जुड़ रहा है, जिससे राहुल गांधी जुड़े हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो राहुल गांधी की यात्रा को लेकर कांग्रेसियों में काफ़ी उत्साह है। बिहार में लंबा पतझड़ झेल चुकी कांग्रेस अब उनके बूते यहां राजनीतिक बसंत लाना चाहती है। महाराष्ट्र में भी पिछले दिनों राहुल का जादू देखने को मिला। शिवसेना के भारी विरोध के बावजूद मुंबई की जनता राहुल के साथ खड़ी नजर आयी न कि बाल ठाकरे के साथ। बाल ठाकरे को उनके ही लोगों ने औकात दिखा दी। राहुल गांधी ने देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर राज्य के दलित, मुस्लिम और अन्य कम.जोर तबके के युवाओं को इस यात्रा से जोड़ा है। राहुल ब्रिगेड क्या ची.ज है इसका न.जारा हाल ही में बिहार में दिखा। केंद्र सरकार में पार्टी के सभी युवा मंत्री, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के तमाम नेता और संगठन पदाधिकारी इस मौक़े पर मौजूद थे। उनकी इन यात्राओं से लाभ यह हुआ कि न सिर्फ़ चर्चा में बल्कि राजनीतिक मुख्यधारा में भी कांग्रेस का फिर से प्रवेश होता हुआ दिखने लगा है।

बादशाहत कायम

कोलकाता टेस्ट में जीत से बादशाहत सलामत रहने के बाद टीम इंडिया का अगर अप्रैल महीने तक ताज कायम रहता है तो उसे आईसीसी विशेष ट्राफी और करोड़ों रुपए से पुरस्कृत करेगी। जैसे ही भारत ने साउथ अफ्रीका को पारी और ५८ रन से हराया, उसने नागपुर में मिली करारी हार का बदला भी ले लिया। हाशिम अमला ने साउथ अफ्रीका की हार को टालने के लिए पूरा जोर लगाया लेकिन दूसरे छोर पर कोई बल्लेबाज उनका साथ न दे सका। इस जीत के साथ दो टेस्ट मैचों की सीरीज १-१ से ड्रा हो गई। भारत का नंबर वन टेस्ट टीम का ताज बरकरार है। भारत की तरफ से दूसरी पारी में हरभजन ने ५ , अमित मिश्रा ने ३ और इशांत शर्मा ने २ विकेट लिए। मैच के अंतिम दिन केवल नौ गेंदें बची थीं। भारत के हाथ से मैच और नंबर एक का ताज फिसलता हुआ नजर आ रहा था, तभी हरभजन ने मोर्न मोर्केल के खिलाफ एलबीडब्ल्यू अपील की। अंपायर की अंगुली उठते ही ईडन गार्डन जश्न में डूब गया। हरभजन सिंह ने अंतिम क्षणों में न सिर्फ टीम को जीत दिलाई बल्कि इसके टीम इंडिया नंबर वन का ताज बरकरार रखते हुए १७५००० अमेरिकी डालर (८०००००० रुपये से ज्यादा) पाने की हकदार बनी। इस जीत ने एक अरब से ज्यादा भारतीयों को रोमांचित कर दिया। भारत को वार्षिक कट आफ (एक अप्रैल) तक शीर्ष पर रहने के लिए यह रकम दी जाएगी। भारत ने नंबर दो टीम को हरा कर साबित कर दिया कि वह टेस्ट का बास बनने के काबिल है। ऐतिहासिक ईडन गार्डन मैदान पर दूसरे टेस्ट के पांचवें दिन हाशिम अमला के प्रयासों पर हरभजन की आखिरी गेंद भारी पड़ी। अमला को मैन आफ द मैच व मैन आफ द सीरीज का पुरस्कार दिया गया। हाशिम अमला (नाबाद १२७) एक छोर पर अड़े रहे। भज्जी ने ५९ रन देकर पांच विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीका ने नागपुर में पहला टेस्ट मैच पारी और छह रन से जीतकर भारत की बखिया उधेड़ दी लेकिन कोलकाता में भारतीय धुरंधरों ने एक पारी और ५८ रनों से जीत हासिल कर इस शर्मनाक हार का बदला ले लिया। भारत की सरजमीं पर यह ७०वीं जीत थी। आईसीसी रैंकिंग में उसके पहले की तरह १२४ अंक हैं। जबकि दक्षिण अफ्रीका के १२० अंक हैं। वह दूसरे स्थान पर है। हालांकि अंतिम दिन जहीर खान की कमी उस समय काफी खली, जब समय बीतता जा रहा था और दक्षिण अफ्रीका की अंतिम जोड़ी जमी हुई थी। जहीर पांव की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण मैदान पर नहीं उतर पाए। आखिर में वह जादुई गेंद हरभजन की अंगुलियों से ही निकली। इस जीत के साथ धौनी की टीम ने आस्ट्रेलिया के लगातार सात वर्ष तक वार्षिक कट आफ तिथि के वक्त नंबर एक बने रहने का सिलसिला भी तोड़ दिया। भारत आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा भी अपने पास रखेगा, जिसे उसने पिछले साल दिसंबर में श्रीलंका पर २-० की जीत से हासिल किया था। जून २००३ से टेस्ट रैंकिंग शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है, जब भारत कट आफ तिथि के समय शीर्ष स्थान पर होगा। भारत २००८ में दूसरे स्थान पर था।

Wednesday, February 17, 2010

आनर किलिंग

एक गैरसरकारी संगठन के सर्वेक्षण इंडियन पापुलेशन सर्वे में कहा गया कि भारत में एक साल में कम से कम ६५० युवक युवतियों को सम्मान के नाम पर मार दिया जाता है और इनमें से ९० प्रतिशत से ज्यादा मामले हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के होते हैं। इस भीषण समस्या को देखते हुए गृह और विधि मंत्रालय ने एक पहल की है, जिसके तहत कानूनी संशोधन कर सीआरपीसी में इसे डालने की कवायद चल रही है।गौरतलब है कि इन दिनों हमारे देश में आनर किलिंग की घटना में वृद्धि देखने को मिल रही है। हमारे मौलिक अधिकारों में किसी भी जाति या धर्म में शादी करने तक की छूट संविधान द्वारा प्रदत है। लेकिन विगत कुछ वर्षों से हरियाणा सहित कई प्रांतों से खाप पंचायतों के द्वारा गोत्र विवाद को तुल आनर किलिंग जैसे जघन्य अपराध लगातार किए जा रहे हैं और सरकारे मौन धारण किए हुए हैं। हाल ही में गृहमंत्री पी. चिदंबरम इन घटनाओं की कठोर निंदा तो की लेकिन वह सिर्फ राष्ट्रव्यापी बहस से आगे नहीं बढ़ पाए। इसका असल कारण है कि आनर किलिंग के लिए कोई अलग कानून नहीं है और फिर यह मामला भी राज्य सरकार की कानून व्यवस्था के दायरे में आता है। परंपराओं की दुहाई देने वाली खाप पंचायतें शायद संविधान से अलग तालिबानी व्यवस्था में विश्वास करती हैं। इस देश का यह दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि कोई भी कानून की मर्यादा का उल्लंघन करे और सरकार की चुप्पी विवशता दिखाती रह जाती है। खाप न्यायालयों की आनर किलिंग के खिलाफ सरकार बहस की बात करती है। बहस से समाज नहीं सुधारता, इसका उदाहरण हम देख सकते हैं कि खुद खाप पंचायतें बहस का अड्डा होते हुए भी अपराध का निर्णय सहर्ष स्वीकार कर लेती हैं। सरकार के पास यह आंकडा रहता है कि खाप जैसी पंचायतों ने अब तक क्या-क्या किया, लेकिन उन पर अंकुश लगाने की दिशा में पहल का जिक्र कहीं नहीं होता। सरकार अब इस बात को लेकर गंभीर हुई है कि आनर किलिंग जैसे अपराध को रोकने के लिए कानूनी संशोधन किया जाना आवश्यक है। नए कानून लाने के स्थान पर सरकार आईपीसी में संशोधन की बात सोच रही है। आईपीसी में संशोधन के बाद आनर किलिंग संगीन अपराध की श्रेणी में आ जाएगा। अब तक ऐसा नहीं था। भारत में आनर किलिंग पर संयुक्त राष्ट्र भी चिंता जता चुका है। संशोधन के बाद आनर किलिंग के दोषी को उम्र कैद से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है।